​सपना देखो तो उसे साकार भी करो।

Write by: Chandan Jat | 14 June 17
सपनों की दुनीया है और यहा पर हर कोई हर पल कुछ न कुछ सपना देखता रहता है, किसी का सपना साकार होता है और किसी का सपना, सपना ही रह जाता है।

सपना देखते तो सभी है, लेकीन उसे साकार कुछ ही लोग कर पाते और वो लोग किसी दुसरे ग्रह से आये हुवे होते है, उन्मे अद्भुत शक्ति होती है। नही! ऐसा बिलकुल नही होता वह लोग हमारे जैसे ही होते है, ओर हमारी तरह ही दिखते है, हमारे जैसे ही होते है। फ़र्क़ सिर्फ़ इतना होता है की वह लोग जो भी सपना देखते है उसे साकार करने की हिम्मत रखते है, उनका सपना एक ही होता है मगर बड़ा होता है, अपने सपने को साकार करने लिये वह किसी भी हद तक जा सकते है, तब जाकर सपना साकार होता है। उनका लक्ष्य फ़िक्स होता है। अपने लक्ष्य को पाने के लिए दिन रात एक कर देते है। अपने आपको पुरी लग्न के साथ अपने सपने को पुरा करने के लिए ढाल लेते है। तब जाकर कही मन्जिल मिलती है।

अगर केवल बातों से कुछ होता तो आज दुनीया का हर आदमी ख़ुश होता। लेकीन ज़्यादातर लोग ज़्यादा से ज़्यादा सपनों में ही जी रहे होते है मगर कभी भी साकार नही कर पाते है, क्योंकि कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है।और कुछ खोने और कुछ कर दिखाने के लिए हिम्मत चाहीए।
सपना तभी देखो जब साकार करने की हिम्मत हो। वरना दिन में देखे गये और रात में देखे गये सपने में कोई अन्तर नही है।
वस देखते रहो सपना, देखने का कोई पैसा नही लग रहा है।
वस काटते रहो जीवन, जीवन का हिसाब कोई थोड़ी ले रहा है॥